गांधी जी आज की आवश्यकता


महात्मा गांधी: आज के भारत में गांधी की अति आवश्यकता क्यों है?

भूमिका: गांधी शब्द और गौरव की अनुभूति:

“गांधी” शब्द सुनते ही हमारा मन स्वतः ही गौरवान्वित हो जाता है। एक गर्व की अनुभूति होती है कि ईश्वर की कृपा से हमें उस पवित्र भूमि पर जन्म लेने का सौभाग्य मिला, जहाँ आज से लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले महात्मा गांधी जैसे महामानव ने जन्म लिया। गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे एक विचार, एक चेतना और एक नैतिक शक्ति थे, जिसने पूरे विश्व को अहिंसा का मार्ग दिखाया।

आज जब हम समाज में बढ़ती नफरत, असहिष्णुता और विभाजन को देखते हैं, तो यह प्रश्न और भी प्रासंगिक हो जाता है—क्या आज भी गांधी की आवश्यकता है?

इसका उत्तर है: आवश्यकता नहीं, बल्कि अति आवश्यकता है।

महात्मा गांधी का जन्म और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर में हुआ था। वह समय भारत के इतिहास का सबसे कठिन दौर था। देश अंग्रेज़ों की गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। आम जनता पर अत्याचार हो रहे थे, आर्थिक शोषण चरम पर था और सामाजिक अन्याय आम बात थी। जिस समय गांधी जी ने इस संसार में आँखें खोलीं, उस समय भारत केवल राजनीतिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक रूप से भी गुलाम था।

दक्षिण अफ्रीका से भारत तक: संघर्ष की शुरुआत:

गांधी जी लगभग 21 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका में रहे। वहाँ उन्होंने नस्लीय भेदभाव और अन्याय को बहुत निकट से देखा और झेला। रंगभेद की अमानवीय नीतियों के खिलाफ उन्होंने शांतिपूर्ण संघर्ष किया।

जब गांधी जी भारत लौटे, तो उन्हें महसूस हुआ कि जिस प्रकार अफ्रीका में अन्याय था, उसी प्रकार भारत भी अंग्रेज़ी शासन की दमनकारी नीतियों से पीड़ित है। यही वह क्षण था जब उन्होंने भारत की आज़ादी के संघर्ष में पूरी तरह उतरने का निर्णय लिया।

अहिंसा: आज़ादी का सबसे अनोखा हथियार

अहिंसा का अर्थ और महत्व:

गांधी जी ने अंग्रेज़ी सत्ता के खिलाफ संघर्ष के लिए जिस हथियार का चयन किया, वह था अहिंसा (Non-Violence)।
यह ऐसा हथियार था जिसे इससे पहले किसी बड़े स्वतंत्रता आंदोलन में इस रूप में नहीं अपनाया गया था।

अहिंसा का अर्थ केवल हिंसा न करना नहीं, बल्कि:

  • अन्याय के सामने डटकर खड़ा होना
  • नैतिक बल से शासक को चुनौती देना
  • बिना हथियार के सत्य की शक्ति दिखाना

ब्रिटिश साम्राज्य की पराजय:

जिस ब्रिटिश साम्राज्य के बारे में कहा जाता था कि “उसके राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता”, उसी साम्राज्य को गांधी जी ने अहिंसा के बल पर घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। यह न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक उदाहरण बन गया।

क्या आज भी गांधी प्रासंगिक हैं?

आज के भारत में यह सवाल बार-बार उठता है कि गांधी जी तो अब हमारे बीच नहीं हैं, तो क्या उनके विचारों की ज़रूरत अब भी है?

आज के समाज की सच्चाई:

आज का समाज:

  • भीड़तंत्र की ओर बढ़ रहा है
  • आपसी विश्वास कम हो रहा है
  • धर्म और जाति के नाम पर विभाजन बढ़ रहा है
  • नफरत को राजनीति और लाभ का साधन बनाया जा रहा है

ऐसे समय में गांधी जी के विचार केवल प्रासंगिक नहीं, बल्कि अत्यंत आवश्यक हैं।

गांधी का सपना और आज का भारत

गांधी जी ने जिस स्वतंत्र भारत का सपना देखा था, वह:

  • सभी धर्मों का सम्मान करने वाला हो
  • आपसी भाईचारे पर आधारित हो
  • सत्य, अहिंसा और सेवा भाव से संचालित हो

दुर्भाग्य से आज हम देखते हैं कि:

  • मंदिर-मस्जिद के विवाद बढ़ रहे हैं
  • समाज में अविश्वास फैल रहा है
  • एक-दूसरे को गिराकर आगे बढ़ने की होड़ लगी है

यह स्थिति गांधी जी के सपनों से बिल्कुल विपरीत है।

धार्मिक सौहार्द और गांधी जी

गांधी जी जीवन भर धार्मिक एकता के पक्षधर रहे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम विभाजन को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए। वे जानते थे कि “फूट डालो और शासन करो” की नीति ने ही देश को कमजोर किया है।

गांधी का प्रिय भजन:

गांधी जी अक्सर एक भजन गाते थे:

ईश्वर अल्लाह तेरो नाम
सबको सन्मति दे भगवान

इस भजन के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि:

  • ईश्वर और अल्लाह अलग नहीं हैं
  • धर्म का उद्देश्य जोड़ना है, तोड़ना नहीं

क्यों कम हो रहे हैं गांधी को समझने वाले लोग?

आज के समय में दुखद सच्चाई यह है कि:

  • गांधी को पढ़ा तो जाता है, अपनाया नहीं जाता
  • उनके विचारों को “पुराना” कहकर नज़रअंदाज़ किया जाता है

जबकि सच्चाई यह है कि जब-जब नफरत बढ़ेगी, तब-तब अहिंसा, प्रेम और सेवा भाव की आवश्यकता और बढ़ेगी।

क्या हमें फिर से गांधी बनने की ज़रूरत है?

गांधी बनने का अर्थ यह नहीं कि: हम वही कपड़े पहनें, वही जीवन शैली अपनाएँ
बल्कि इसका अर्थ है:

अन्याय के खिलाफ खड़े होना, नफरत के बदले प्रेम चुनना, सत्ता नहीं, सत्य का साथ देना। अगर समाज में कुछ लोग भी गांधी के विचारों पर चलने लगें, तो परिवर्तन अवश्य संभव है।

गांधी जयंती पर संकल्प

आइए, गांधी जयंती के पावन अवसर पर हम सब यह संकल्प लें कि:

  • हम अहिंसा का मार्ग अपनाएँगे
  • सभी धर्मों का सम्मान करेंगे
  • समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ाएँगे
  • कोई किसी से भयभीत न हो
  • हर व्यक्ति को सम्मान मिले
  • विविधता में एकता विश्व के लिए उदाहरण बने

एक ऐसा भारत बनाएँगे जहाँ:

निष्कर्ष: गांधी का भारत फिर संभव है

पूरे विश्वास और आशा के साथ यह कहा जा सकता है कि वह दिन अवश्य आएगा, जब भारत फिर से गांधी के सपनों का भारत बनेगा। यह तभी संभव है, जब हम गांधी को केवल मूर्ति और नोटों तक सीमित न रखें, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में उतारें।

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6 टिप्पणियाँ

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बेनामी
admin
6 अक्टूबर 2019 को 12:10 pm बजे ×

Suhail bhai!!! Very great written vichar. All Indian people Think and Follow this.

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Suhel Ji
admin
6 अक्टूबर 2019 को 2:56 pm बजे ×

बहुत बहुत शुक्रिया भाई। प्लीज अपना नाम तो बता दें।

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Saad
admin
8 अक्टूबर 2019 को 9:41 pm बजे ×

Mashallah Suhel sahab... Bohot khoob

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बेनामी
admin
9 अक्टूबर 2019 को 11:43 am बजे ×

Well initiative.... Keep it up dost.....👌👌👌💐💐💐

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